जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने का मार्ग

उत्तम पुस्तकें और आध्यात्मिक ग्रंथों का योगदान लोकप्रिय जैन साहित्यकार टोडरमल एक ग्रंथ लिखने में जुटे हुए थे, जो बाद में ‘मोक्ष मार्ग’ नाम से लोकप्रिय हुआ। वे सुबह आँख खुलते ही पूरी एकाग्रता के साथ लिखने में जुट जाते थे और रात देर तक लिखते रहते थे। उन्हें न खाने-पीने की सुध थी, न […]

आओ सोचना सीखें – मन की बड़बड़ से राहत पाएँ

The Art of Thinking

एक काम जो हर इंसान बायडिफॉल्ट करता है, वह है सोचना यानी विचार करना। मगर क्या कभी आपने इस तरह से सोचा है कि मैंने सोचना कब से शुरू किया… मुझे अकसर कौन से विचार आते हैं… कैसे विचार आते हैं… ऐसे ही विचार क्यों आते हैं… कब-कब विचार मुझ पर हावी हो जाते हैं… […]

एक साथ मीठे और उदासीन कैसे बनें – तोलमोल के मुँह खोल

शब्द की ताकत से भला कौन परिचित नहीं है! शब्द-शक्ति के उदाहरणों से इतिहास भरा पड़ा है। वरदान, शाप और प्रतिज्ञा के फल की कहानियाँ आप पढ़ते, सुनते या देखते आए हैं। इन सबके पीछे जो शक्ति छिपी है, वह है शब्द शक्ति। आश्चर्य की बात तो यह है कि हर इंसान शब्द शक्तिकोे अपने […]

‘लोग क्या कहेंगे’ क्या आप डरेंगे – जीवन को दिशा देनेवाले कदम

विश्व में दो प्रकार के लोग हैं। पहले वे जो सिर्फ सपना देखते हैं और दूसरे वे जो अपना हर सपना पूर्ण करने की ठान लेते हैं। किसी ने विश्व को चंद्रमा तक पहुँचाने का निर्णय लिया। लोगों ने उसकी आलोचना की मगर फिर भी वह पूर्ण हो गया। किसी ने जाति-धर्म संबंधित भेदभाव मिटाने […]

सुस्ती को दूर करने का नया दृष्टिकोण – रेडी स्टेडी अ‍ॅण्ड स्लीप गो

अध्याय का उप शीर्षक पढ़कर आप सोच रहे होंगे,‘रेडी- स्टेडी-गो’ के बीच में ‘स्लीप’ कैसे आ गया? दरअसल यह ‘स्लीप’ सुस्त लोगों द्वारा लगाया हुआ है। उनके लिए यह वाक्य यही खत्म हो जाता है। मगर आप इस ‘स्लीप’ को एक्टिव बनाकर, ‘गो’ तक लाएँ और सुस्ती को दूर करने का नया दृष्टिकोण अपनाएँ। क्योंकि […]

अति आत्मविश्वास और लापरवाही से बचें – परिपूर्ण जीवन की ओर पाँच कदम

अर्नेस्ट हेमिंग्वे नामक बालक पूरे स्कूल में सबसे बुद्धिमान छात्र था। एक बार स्कूल में कहानी प्रतियोगिता हुई, जिसमें सभी विद्यार्थियों को कहानी लिखने के लिए पंद्रह दिन का समय दिया गया। सबसे अच्छी कहानी लिखनेवाले को पुरस्कार दिया जानेवाला था। सभी का मानना था कि पुरस्कार हेमिंग्वे को ही मिलेगा क्योंकि वह सबसे बुद्धिमान […]

पावर ऑफ टेंशन, इंट्यूशन, इंटेशन – सिर सलामत तो पगड़ी हज़ार

दो दोस्त भानू और प्रकाश राजस्थान के रेतीले इलाके में चलते जा रहे थे। गर्मी से बचने के लिए उन्होंने सिर पर पगड़ी पहनी हुई थी। तभी वहाँ पर धूलभरी आँधी चलने लगी। आँधी इतनी तेज़ होने लगी कि उन दोनों की पगड़ी उतरकर दूर जा गिरी। भानू अपनी पगड़ी के पीछे जाने लगा तो […]

एक इंद्रि से जग कैसे जीतें – शब्द-स्वाद लक्ष्य

सबसे पहले आपके मुँह में घी-शक्कर! आप जानते हैं कि यात्रा पर निकलते वक्त किसी को घी-शक्कर खिलाई जाती है ताकि उसकी यात्रा सफल हो। जुबान से जग जीतना भी एक यात्रा ही है, जिसके सफल होने के लिए आपको शुरुआत में ही घी-शक्कर खिलाई जा रही है। साथ ही घी-शक्कर इस बात की भी […]

नकारात्मक भावनाओं से मुक्ति के पाँच कदम

how to get rid of negative emotions

भावनाओं को जानकर सही शब्दों में व्यक्त करें एक संत के पास गाँव के लोग अकसर शिकायतें लेकर आते थे कि उन्हें किसी पड़ोसी, रिश्तेदार आदि से परेशानी है। वे संत से यह भी कहते कि ‘आप कुछ ऐसा टोना-टोटका करें कि हमारे दुश्मनों का नुकसान हो जाए।’ एक दिन संत ने लोगों से कहा- […]

ज़िंदगी का सफर ‘सुहाना’ बनाने का राज़ – नियामतें गिनने का नियम

एक बार बचपन में मीरा अपने दादाजी के साथ बाहर गई थी। रास्ते में उनकी मुलाकात एक साधु से हुई, जिनके पास श्रीकृष्ण की बहुत ही सुंदर मूरत थी। मूरत देखते ही मीरा ज़िद करने लगी कि ‘यह मुझे चाहिए’ पर साधु महाराज ने मूरत देने से इनकार कर दिया। दादाजी ने बालिका मीरा को […]

अपने लक्ष्यों में दृष्टिलक्ष्य का इंजन लगाएँ – ऊर्जा और दुगुने उत्साह का जोड़

एक बड़ी सी नदी के पार एक गाँव था। गाँव से बाहर कहीं भी जाने के लिए गाँववालों को अपनी-अपनी नाव का सहारा लेना पड़ता था, जिन्हें वे गाँव में ही मिलनेवाले बाँस से बनाते थे। सुबह सब गाँववाले अपनी-अपनी नाव लेकर जल्दी-जल्दी काम पर जाते और शाम होने तक लौट आते। एक बार गाँव […]

कुदरत का नियम और लक्ष्य – खिलना, खुलना और खेलना क्यों ज़रूरी है

पोलैंड में धर्मगुरु हाफिज हईम रहते थे, जिनकी ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई थी। एक दिन एक अमरिकी यात्री उनसे मिलने उनके घर गया। उसे यह देखकर हैरानी हुई कि धर्मगुरु होकर भी हाफिज हईम एक छोटे से कमरे में रहते थेऔर उसमें केवल पुस्तकें थीं। फर्नीचर तो दूर की बात वहाँ पर एक छोटा […]

एक साथ मीठे और उदासीन कैसे बनें – तोलमोल के मुँह खोल

एक साथ मीठे और उदासीन कैसे बनें तोलमोल के मुँह खोल

शब्द की ताकत से भला कौन परिचित नहीं है! शब्द-शक्ति के उदाहरणों से इतिहास भरा पड़ा है। वरदान, शाप और प्रतिज्ञा के फल की कहानियाँ आप पढ़ते, सुनते या देखते आए हैं। इन सबके पीछे जो शक्ति छिपी है, वह है शब्द शक्ति। आश्चर्य की बात तो यह है कि हर इंसान शब्द शक्तिकोे अपने […]

आपके पास सच्चा प्रेम है या केवल उसका फोटो?

Happy St. Valentine’s Day!

हैपी सेंट वैलेंटाइन डे! इस वेलैंटाइन डे पर असली और नकली प्रेम के बीच फर्क समझें, एक कहानी द्वारा। एक इंसान अपने दिनभर के काम निपटाने के लिए घर से निकल रहा था। उसका अपना एक बेटा था। घर से निकलते समय उसने अपने बेटे को, मंदमति पड़ोसी के पास सँभालने के लिए सौंप दिया […]

गौरवशाली जीवन की शान – परनिर्भरता से कैसे और क्यों बचें

इस संसार में ऐसा कौन होगा जो सुखी, संतुष्ट और गौरवशाली जीवन जीने की अभिलाषा न रखता हो? हर कोई चाहता है कि वह और उसका परिवार खुशहाल जीवन जीएँ। ऐसे में सवाल उठता है कि वह कौन सा जादुई मंत्र है, जो आपकी इस चाहत को पूर्ण कर सकता है? वह है आत्मनिर्भरता का […]

हमारी इच्छाओं के पीछे छिपी असली खुशी

26 जनवरी 1950, लगभग तीन वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद हमारे राष्ट्र का संविधान समाप्ति पर पहुँचा। उन तीन वर्षों में, संविधान के वास्तुकारों ने चर्चा की कि हमें, एक राष्ट्र होने के नाते किन-किन बातों को छोड़ना और किन्हें अपनाना चाहिए। उन्होंने एक रेखाचित्र तैयार किया कि कैसे एक राष्ट्र खुद का बेहतरीन […]

ग्लोरी ऑफ एक्शन – कर्म (एक्शन) की महिमा

सरश्री द्वारा दिए गए नववर्ष संदेश का अंश नववर्ष की शुभकामनाएँ! गोआ में आपका स्वागत है… वर्ष 2020 का यह संदेश बहुत ही सरल है … ‘आपको गोआ जाना है!’ यह पढ़कर आपको ज़रूर आश्चर्य हो रहा होगा। आप सोचेंगे, ‘अरे! हमें गोआ जाने के लिए क्यों कहा जा रहा है।’ आपको गोआ जाना है, […]

‘निरंतरता’ का गुण कैसे अपनाएँ?

कोई कार्य करने में सभी को शुरुआत में उत्साह महसूस होता है। मगर कुछ दिनों बाद उनका उत्साह कम होने लगता है। जिसके परिणामस्वरूप कार्य में निरंतरता नहीं रहती। ऐसे में सवाल उठता है कि निरंतरता का गुण कैसे अपनाएँ? जिसके जवाब में सबसे पहले कहा जाएगा- ‘निरंतरता ही सफलता की कुंजी है।’ जब भी […]

चिंता मुक्ति का सरल सूत्र

चिंता मुक्ति का सरल सूत्र ‘तब’ की ‘तब’ देखें करने योग्य कर्तव्य कर्म अब करें इंसान के जीवन में कभी खुशी-कभी गम का खेल चलता रहता है। ऐसे में कई बार उसके मन में चिंता के बादल मँडराते हैं। हरेक की अलग-अलग चिंता हो सकती है। अविवाहित को शादी की… बच्चों को पढ़ाई की… गृहिणी […]

चाहतों के जंजाल से कैसे बचें

चाहत… इच्छा… ख्वाहिश नाम कोई भी दें, सभी का अर्थ एक ही है। देखा जाए तो इंसान हर पल ख्वाहिशों से घिरा रहता है। एक ख्वाहिश पूरी हुई नहीं कि दूसरी सामने खड़ी होती है। उसके बाद तीसरी… चौथी… यह सिलसिला जीवन के अंत तक चलता ही रहता है। यहाँ तक कि मृत्यु के समय […]

कर्म-भाग्य से मुक्ति – सही उद्देश्य से हो फल की प्राप्ति

हकीकत में कर्म क्या है? क्या इंसान के कर्मों के अनुसार ही उसका फल आता है? ‘जैसी करनी, वैसी भरनी’ इस कहावत से आप वाकिफ होंगे लेकिन क्या सचमुच ऐसा है? या इसके पीछे कुछ और रहस्य छिपा है? कर्म से संबंधित लोगों के मन में ऐसे अनगिनत सवाल उठते हैं, जिनके जवाब कभी मिलते […]

आपके साहस की पहचान डर – डर तुम अपना काम करो… मैं मेरा करता हूँ

‘डर’ खाली यह शब्द सुनकर ही क्या होता है? धड़कन तेज चलने लगती है, हाथ-पैर काँपने लगते हैं, पसीना छूटता है और निर्णय लेने की क्षमता भी उस समय के लिए समाप्त हो जाती है। ‘डर का डर’ सामान्यतः सबको होता है। आज तक हम डर से ही डरते आए हैं। लेकिन यहाँ पर डर […]

वसुंधरा का वैभव पहचानें – एको फ्रेंडली बनें

जीवनोपयोगी आवश्यकताओं की पूर्ति में आज मनुष्य ऐसा फँसा है कि प्रकृति से दूर-दूर होता जा रहा है। लेकिन आज वसुंधरा दिन के अवसर पर यह मौका मिला है कि हम कुछ देर रुककर हमारी प्रकृति का विचार करें। इस वसुंधरा का विचार करें, जिससे हमारा जीवन संचालित है। ‘इको फ्रेंडली’ (पर्यावरणपूर्वक) समाज की दिशा […]

पारिवारिक रिश्तों को मिले नया आयाम – स्वस्थ परिवार का यही है राज़

अधिकतर लोगों की यही आशा होती है कि ‘मेरा परिवार खुशहाल, हँसता-खेलता रहे। मेरी खुशियों में मेरा परिवार शरीक हो ही लेकिन जब मैं थका-हारा, दुःखी, परेशान होकर घर लौटूँ तब भी मुझे वहाँ वही प्यार, विश्वास और सबका साथ मिले। सबके होते हुए मुझे कभी भी अकेलापन महसूस न हो। मेरा परिवार मेरा सबसे […]

लीडरगम हनुमान की लीडरशीप

पृथ्वी पर कई अनोखे अवतार हुए हैं। लेकिन इन अवतारों को केवल आध्यात्मिक कहानी मानकर उनकी पूजा ही होती रहती है। जबकि होना यह चाहिए कि ऐसे अवतारों के जीवन को समझकर, अपने जीवन में भी उनके गुणों को उतारना चाहिए। आज हनुमान जयंती के अवसर पर हम भगवान शिव के अवतार रामभक्त हनुमान के […]

भगवान महावीर की शिक्षाओं का सच्चा परिचय

ध्यान मेरा पिता है, अहिंसा मेरी माता है, ब्रह्मचर्य मेरा भाई है, अनासक्ति मेरी बहन है, शांति मेरी पत्नी है और सत्य मेरा मित्र है। अगर ये सब मेरा परिवार है तो मैं अकेला कहाँ हूँ।’ महावीर कौन? कोई महाबली हो तो क्या उसे महावीर कहा जाए? कोई हिमालय पर्वत चढ़ता है तो क्या उसे […]

राम का महत्व

कस्तूरी कुंडल बसे, मृग ढूंढ़ै बन माहि। ऐसे घट-घट राम हैं, दुनिया देखे नाहि॥ संत कबीर के इस दोहे का अर्थ है – अपनी ही कस्तूरी की महक से बौराया हिरन उस कस्तूरी को वन-वन खोजता फिरता है। क्योंकि वह इस बात से अनजान है कि कस्तूरी उसकी अपनी ही नाभि में छिपी है। इसी […]

जीज़स द्वारा किए गए इशारे

ईसाई धर्म में मनाए जानेवाले तीन मुख्य दिन हैं- क्रिसमस, गुड फ्राइड और ईस्टर संडे। संपूर्ण विश्वभर में 25 दिसंबर को क्रिसमस का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इसी दिन पर यीशु क्राइस्ट यानी जीज़स का जन्म हुआ था। ईसाईयत के अनुसार ईश्वर के बेटे जीज़स को शुक्रवार को सलीब पर चढ़ाया गया […]

आत्मनिर्भर नारी

ईश्वर ने जब संसार की रचना की तब उसने रचनात्मकता के शिखर पर नर और नारी की रचना की। नर व नारी यानी शिव और शक्ति, जिससे संसार पूर्ण होता है। स्त्री व पुरुष दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं, एक-दूसरे के बिना वे आधे-अधूरे हैं। ईश्वर ने पुरुष को सशक्त एवं शक्तिशाली बनाया तो नारी […]

आज्ञा और एकाग्रता का दूसरा नाम – संत एकनाथ

जिस प्रकार पानी में चट्टान को तोड़ने की ताकत होती है, उसी प्रकार संतों के व्यवहार में दुर्जनता को जीतने का सामर्थ्य होता है। ~ संत एकनाथ गुरु आज्ञा ने ऐसा पीछा किया कि रोज़मर्रा की बातों से ज्ञान मिलने लगा, शब्द के आगे ज्ञान दौड़ने लगा और जो कुछ भी मन में आया, वह […]

अभंग भक्ति का नाम – संत तुकाराम

महाराष्ट्र संतों की कर्मभूमी है। जहाँ पर संत ज्ञानेश्वर, संत नामदेव, संत एकनाथ, रामदास स्वामी, जैसी अनेक महान विभूतियों ने जन्म लिया और विश्व उद्धार करने के लिए लोगों को ज्ञान दिया। उच्च नैतिक मूल्यों की हिफाज़त, लोकशिक्षण, लोक संग्रह, भक्ति मार्ग ऐसे कई महत्त्वपूर्ण कार्य ऐसी विभूतियों द्वारा हुए, आज भी हो रहे हैं। […]

असली होली कैसे मनाएँ

एक होली है बाहर की, जो सभी मनाते हैं। लेकिन अंदर की होली नहीं जलाई तो बाहर की होली का भी कुछ फायदा नहीं। होली का त्यौहार सिर्फ एक दिन का नहीं होता। अंदर की होली का जलना यानी अब हमारे अंदर मनन शुरू होना। इस होली की अग्नि हमारे जीवन में तब तक जलती […]

महाशिवरात्रि – शिव के आंतरिक गुण

विविधता में एकता संजोए विभिन्न संस्कृतियों और धर्मोंवाला ‘भारत देश’ विश्व में अपना अलग स्थान रखता है। अपने पर्व-त्योहारों और रीति-रिवाजों के लिए यह अनोखा देश माना जाता है। प्रत्येक खुशी के अवसर को त्योहार और राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मनाने की इस देश की प्राचीन परंपरा रही है। बारहों महीने कोई न कोई […]

2018 में समस्या सुलझाना और निर्णय लेना भगवद्गीता से सीखें

हम नयी सदी के 18वें साल में प्रवेश कर चुके हैं इसलिए 18 ये अंक वर्तमान में विशेष महत्त्व रखता है। अलग-अलग धर्मों और परंपराओं में भी 18 को विशेष स्थान दिया गया है। जैसे कि यहुदियों में दिया जानेवाला दान 18 के गुणज में होता है। चीन में भी 18 अंक को शुभ माना […]

दुःख मुक्ति की दवा खुशी का कुर्ता

एक राज्य का राजा काफी दिनों से बड़ा दुःखी था। कईं इलाज करवाने के बावजूद राजा का दुःख कम न हुआ। फिर राज्य के एक सज्जन ने राजा को ‘खुश इंसान का कुर्ता’ पहनने की सलाह दी। राजा के सिपाही तुरंत ही ऐसे इंसान की तलाश में निकल पड़े जो पूर्णतः खुश है। लेकिन देखा […]

सही निर्णय कैसे लें

जिंदगी में निर्णय लेना क्या वाकई इतना महत्वपूर्ण है? जी हाँ! यदि हम खुद अपने निर्णय नहीं ले सकते तो हमें औरों का कहना मानना पड़ता है। यहाँ तक कि लोगों ने हमारी जिंदगी के बारे में किए हुए फैसलों पर भी चुपचाप अमल करना पड़ता है। भविष्य में शायद आपको इस बात का पछतावा […]

सुखी जीवन के पासवर्ड

एक इंसान प्रतिदिन ईश्वर से प्रार्थना किया करता था कि ‘मेरी लॉटरी लग जाए ताकि मेरी आर्थिक समस्याएँ सुलझ जाएँ और पैसों की तंगी से उत्पन्न मेरा दुःख समाप्त हो जाए।’ प्रतिदिन ईश्वर से प्रार्थना करके भी कोई फल न आने के कारण हताश होकर उसने ईश्वर से कहा, ‘हे ईश्वर! आखिर तुम मेरी प्रार्थना […]

वर्तमान में रहने की कला – संकल्प आनंदित जीवन का

एक बार एक राजा ने अपने पड़ोसी राजा को तीन फूल भिजवाए। तीनों फूलों का रंग-रूप, सुगंध इत्यादि एक जैसा था। फूल ले जानेवाले दूत को आदेश दिया गया कि राजदरबार में तीनों फूल दिखाकर राजा से पूछना कि ‘इन तीनों फूलों में से असली फूल कौन सा है और जो भी जवाब मिले, वह […]

अपने विचारों को कैसे देखें

इंसान के मन में अनगिनत विचार आते रहते हैं। वे विचार साक्षी होकर देखे जाते हैं। यदि आपसे कोई सवाल पूछें कि आप आवाज कैसे सुनते हैं? तब आप उसका जवाब शब्दों में नहीं दे पाएँगे क्योंकि यह अनुभव करने की बात है, बताने की नहीं। उसी तरह मन के विचारों को भी आप देख […]

आत्मबली, बुद्धिबली और बाहुबली हनुमान लीडरगम का दम

सभी भक्तों में हनुमान एक ऐसी चरित्र रेखा हैं, जो श्रीराम की ही तरह सभी के दिलों पर खिंची हुई है। यह रेखा लक्ष्मण रेखा की तरह अति गहरी है, जिसे दुनिया का कोई रावण पार नहीं कर सकता। हनुमानजी स्वयं महामनस्वी थे यानी उनमें मन, कर्म तथा वाणी की एकता थी। उनका मनोबल जितना […]

कम्युनिकेशन कैसे करें

व्यक्तिगत जीवन हो या सामाजिक, ऑफिस हो या घर, स्वयं के साथ हो या दूसरों के साथ, सभी जगहों पर दिखनेवाली एक कॉमन समस्या है, ‘मिस कम्युनिकेशन’ यानी गलत तरीके से संवाद करना। सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि कम्युनिकेशन यानी क्या? बातचीत के दौरान एक इंसान सामनेवाले को जो संदेश देना चाहता है, […]

जल प्रार्थना

हे परमात्मा… हे ईश्‍वर… मुझे मुझे शुद्ध करने में मदद करो, मुझे मुझे बुद्ध बनने में मदद करो, मुझे मुझे डिटैच (अनासक्त) होने में मदद करो, मुझे मुझे समभाव में रहने में मदद करो, मुझे मुझे रंगीन तूफान में आँखें खुली रखने में मदद करो। मुझे कोई रंग न चिपके ताकि मैं नारंगी अवस्था में […]

आज्ञा और एकाग्रता का दूसरा नाम संत एकनाथ

गुरु आज्ञा ने ऐसा पीछा किया कि रोज़मर्रा की बातों से ज्ञान मिलने लगा, शब्द के आगे ज्ञान दौड़ने लगा और जो कुछ भी मन में आया, वह सब ग्रंथार्थ होने लगा। ‘एकनाथी भागवत’ की रचना करते समय संत एकनाथ महाराज द्वारा कहे गए ये शब्द उनकी गुरु के प्रति भक्ति को दर्शाते हैं। सद्गुरु […]

मानव जीवन का लक्ष्य क्या है?

1. : मानव जीवन का लक्ष्य क्या है? सरश्री: मानव जीवन का लक्ष्य है समग्रता से खिलना, खुलना और खेलना यानी अपनी उच्चतम संभावना को खोलना। जैसे बगिया का हर फूल पूर्ण रूप से खिलना चाहता है। हर फूल का लक्ष्य होता है कि वह पूर्ण खिले और हवाओं के ज़रिए अपनी ख़ुशबू चारों दिशाओं […]

अल्प वनवास – सरश्री द्वारा नए साल 2014 का संदेश

रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम को 14 साल के वनवास पर भेजा गया था। 2014 यह साल में आप भी वनवास पर जा सकते हैं। 14 वर्षों के बड़े वनवास पर नहीं बल्कि एक छोटे वनवास पर, जिससे आपकी आध्यात्मिक उन्नति होगी। यहाँ पर वनवास लेने का अर्थ एक निश्‍चित समय अवधि निर्धारित कर, उस […]

ब्रह्माण्डीय भ्रम से मुक्ति

किसी भी चीज़ से मुक्ति पाने के लिए, हमें सबसे पहले उसे समझना होगा। तो पहले हम माया को समझने का प्रयत्न करते हैं – ब्रह्माण्डीय भ्रम – इससे मुक्ति पाने से पूर्व इसे जानना होगा। यदि माया की लोकप्रिय अवधारणा की बात करे तो भौतिकवाद की तस्वीर सामने आ जाती है, जिसमें आप भौतिक […]

ईश्वर की इच्छा

एक माँ के तीन बेटे हैं। वे तीनों एक कमरे में बैठे हुए हैं। पहला बेटा टीवी देखना चाहता है, दूसरा बेटा रेडियो सुनना चाहता है और तीसरा बेटा एक चित्र बनाना चाहता है। वे तीनों एक-दूसरे से झगड़ा कर रहे हैं। पहला बेटा कहता है, ‘‘ये चित्र बनाना बंद करो।‘‘ और तीसरा बेटा कहता […]

चार नई प्रतिज्ञाएँ, नए साल (२०१६) के लिए

आत्मबल पाने के बाद लें नई सौगंध: 2016 नए साल का सरश्री द्वारा संदेश… हममें से अधिकतर लोग नए साल के नए संकल्प लेते हैं। हम अपने स्वास्थ्य व आर्थिक उन्नति पर ध्यान देने की कई नई प्रतिज्ञाएँ करते हैं। ज़्यादातर ये संकल्प अधिक समय तक नहीं टिकते। बेहतर यह होगा कि हम ऐसी प्रतिज्ञाएँ […]

मैं सही मार्ग पर हूँ या नहीं?

मैं परम सत्य की खोज में हूॅ। लेकिन, क्या इसके लिए सचमुच इतना प्रयास करना और ष्ारीर को इतना कश्ट देना जरूरी है? क्याऐसा कोई नहीं है, जो मेरे सारे सवालों के जवाब दे सके?दुनिया भर में जिन आध्यात्मिक तरीकों का प्रचार-प्रसार हो रहा है, उनमें कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है, कहीं न कहीं […]

1 मई श्रम दिवस – कर्मबंधन से मुक्ति

श्रम दिवस हमारे किए गए कर्म के पहलुओं को रेखांकित करता है| कर्म के प्रकार से लेकर उसकी प्रकृति तक को अनेक ढंग से हमारे बीच पेश भी करता है| चाहे हम सीईओ हों या एक कारपेंटर, हम एक तरह से कर्म के किसी हिस्से को निभा रहे होते हैं| सीईओ की बात करें तो […]

सुनहरी समझ

एक समय की बात है, जब एक इंसान अपनी आजीविका चलाने के लिए पत्थर तोड़ा करता था| वह गॉंव के सिवान में पहाड़ियों पर हर रोज़ जीतोड़ मेहनत करता था| एक दिन पत्थर तोड़ते वक्त उसके ज़हन में एक खयाल कौंधा| उसने सोचा कि मैं दिनभर पत्थर तोड़ने के लिए हाड़तोड़ परिश्रम करता हूँ और […]

विचारशून्य होने का सबसे आसान तरीका

कई लोग सोचते हैं कि शून्य में जाना कठिन है| यहॉं हम आपको एक ऐसी ध्यान पद्धति से रू-ब-रू कराने जा रहे हैं, जिससे कि आप विचारशून्य स्थिति से वाकिफ हो सकें| ‘विचार क्रमांक ध्यान’ इस ध्यान के ज़रिए आप शून्य में जा सकते हैं| हो सकता है कि यह स्थिति महज़ क्षणिक हो| * […]

आखिर जरूरत ही क्या है अध्यात्म की… (पट्टी खोलें आंखों की, सामने ही है प्रकाश)

खोजी: अध्यात्म की परिभाषा क्या है और जीवन में इसकी कितनी ज़रूरत है? सरश्री: अध्यात्म का अर्थ है खुद को जानना और अपने सच्चे स्वभाव की, सच्ची प्रकृति की पहचान करना| कई इंसान सोचते हैं कि अध्यात्म की इस हद तक तो कोई ज़रूरत ही नहीं है| आइए, इसे एक उदाहरण से समझें| कल्पना कीजिए […]

१४ ​​फरवरी – संत वैलेंटाइन डे असल में क्यों मनाया जाता है?

संत वैलेंटाइन रोमन काल में एक चर्च में पादरी थे| रोम के राजा ने घोषणा की कि शादीशुदा सिपाही राज्य के लिए किसी काम के नहीं हैं, अगर वे शादी कर लेते हैं तो उनका मन भटकता है और इसीलिए वह उन लोगों को सिपाहियों के रूप में बढ़ावा दे रहा था जिन्होंने शादी नहीं […]

2015 नए साल का सरश्री द्वारा संदेश : सही सवाल की शक्ति

‘सवाल’ आध्यात्मिक उन्नति के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें हमें आत्मसाक्षात्कार तक पहुँचाने की ताकत होती है। कुछ सवाल इंसान में बचपन से ही मौजूद होते हैं। इंसान कई सदियों से ये सवाल पूछता आया है जैसे मैं कौन हूँ? मैं पृथ्वी पर क्यों हूँ? इत्यादि। ये सवाल आपके मन में भी कभी न […]

१ अप्रैल – आध्यात्मिक बीज डालने का दिन

दुनियाभर में १ अप्रेल को मूर्ख दिवस के रूप में मनाया जाता है| इस दिन लोग एक-दूसरे के साथ मसखरी करते हैं और उस मजाक से उत्पन्न हुई स्थितियों पर हँसते हैं| पर तब क्या होगा, जब वह मजाक आपके साथ किया जा रहा हो? अध्यात्म की दृष्टि से देखें तो इस सृष्टि का सबसे […]

लक्ष्य प्राप्ति में सदा आपके साथ आपका सबल चरित्र

हम सब पृथ्वी पर अपने-अपने विशेष उद्देश्य लेकर आये हैं| कुदरत हमें अपना लक्ष्य पाने के लिए सदा मार्गदर्शन दे रही है| यदि हमारा चरित्र बलवान होगा तो हम बिना विचलित हुए कुदरत के बताये रास्ते पर सीधे चल पायेंगे वरना हम हर छोटी घटना में लालच, सुस्ती और अज्ञान की वजह से डगमगाकर गिर […]