एक साथ मीठे और उदासीन कैसे बनें तोलमोल के मुँह खोल

एक साथ मीठे और उदासीन कैसे बनें – तोलमोल के मुँह खोल

शब्द की ताकत से भला कौन परिचित नहीं है! शब्द-शक्ति के उदाहरणों से इतिहास भरा पड़ा है। वरदान, शाप और प्रतिज्ञा के फल की कहानियाँ आप पढ़ते, सुनते या देखते आए हैं। इन सबके पीछे जो शक्ति छिपी है, वह है शब्द शक्ति। आश्चर्य की बात तो यह है कि

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Happy St. Valentine’s Day!

आपके पास सच्चा प्रेम है या केवल उसका फोटो?

हैपी सेंट वैलेंटाइन डे! इस वेलैंटाइन डे पर असली और नकली प्रेम के बीच फर्क समझें, एक कहानी द्वारा। एक इंसान अपने दिनभर के काम निपटाने के लिए घर से निकल रहा था। उसका अपना एक बेटा था। घर से निकलते समय उसने अपने बेटे को, मंदमति पड़ोसी के पास

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गौरवशाली जीवन की शान – परनिर्भरता से कैसे और क्यों बचें

इस संसार में ऐसा कौन होगा जो सुखी, संतुष्ट और गौरवशाली जीवन जीने की अभिलाषा न रखता हो? हर कोई चाहता है कि वह और उसका परिवार खुशहाल जीवन जीएँ। ऐसे में सवाल उठता है कि वह कौन सा जादुई मंत्र है, जो आपकी इस चाहत को पूर्ण कर सकता

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हमारी इच्छाओं के पीछे छिपी असली खुशी

26 जनवरी 1950, लगभग तीन वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद हमारे राष्ट्र का संविधान समाप्ति पर पहुँचा। उन तीन वर्षों में, संविधान के वास्तुकारों ने चर्चा की कि हमें, एक राष्ट्र होने के नाते किन-किन बातों को छोड़ना और किन्हें अपनाना चाहिए। उन्होंने एक रेखाचित्र तैयार किया कि कैसे

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ग्लोरी ऑफ एक्शन – कर्म (एक्शन) की महिमा

सरश्री द्वारा दिए गए नववर्ष संदेश का अंश नववर्ष की शुभकामनाएँ! गोआ में आपका स्वागत है… वर्ष 2020 का यह संदेश बहुत ही सरल है … ‘आपको गोआ जाना है!’ यह पढ़कर आपको ज़रूर आश्चर्य हो रहा होगा। आप सोचेंगे, ‘अरे! हमें गोआ जाने के लिए क्यों कहा जा रहा

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‘निरंतरता’ का गुण कैसे अपनाएँ?

कोई कार्य करने में सभी को शुरुआत में उत्साह महसूस होता है। मगर कुछ दिनों बाद उनका उत्साह कम होने लगता है। जिसके परिणामस्वरूप कार्य में निरंतरता नहीं रहती। ऐसे में सवाल उठता है कि निरंतरता का गुण कैसे अपनाएँ? जिसके जवाब में सबसे पहले कहा जाएगा- ‘निरंतरता ही सफलता

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चिंता मुक्ति का सरल सूत्र

चिंता मुक्ति का सरल सूत्र ‘तब’ की ‘तब’ देखें करने योग्य कर्तव्य कर्म अब करें इंसान के जीवन में कभी खुशी-कभी गम का खेल चलता रहता है। ऐसे में कई बार उसके मन में चिंता के बादल मँडराते हैं। हरेक की अलग-अलग चिंता हो सकती है। अविवाहित को शादी की…

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चाहतों के जंजाल से कैसे बचें

चाहत… इच्छा… ख्वाहिश नाम कोई भी दें, सभी का अर्थ एक ही है। देखा जाए तो इंसान हर पल ख्वाहिशों से घिरा रहता है। एक ख्वाहिश पूरी हुई नहीं कि दूसरी सामने खड़ी होती है। उसके बाद तीसरी… चौथी… यह सिलसिला जीवन के अंत तक चलता ही रहता है। यहाँ

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कर्म-भाग्य से मुक्ति – सही उद्देश्य से हो फल की प्राप्ति

हकीकत में कर्म क्या है? क्या इंसान के कर्मों के अनुसार ही उसका फल आता है? ‘जैसी करनी, वैसी भरनी’ इस कहावत से आप वाकिफ होंगे लेकिन क्या सचमुच ऐसा है? या इसके पीछे कुछ और रहस्य छिपा है? कर्म से संबंधित लोगों के मन में ऐसे अनगिनत सवाल उठते

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आपके साहस की पहचान डर – डर तुम अपना काम करो… मैं मेरा करता हूँ

‘डर’ खाली यह शब्द सुनकर ही क्या होता है? धड़कन तेज चलने लगती है, हाथ-पैर काँपने लगते हैं, पसीना छूटता है और निर्णय लेने की क्षमता भी उस समय के लिए समाप्त हो जाती है। ‘डर का डर’ सामान्यतः सबको होता है। आज तक हम डर से ही डरते आए

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वसुंधरा का वैभव पहचानें – एको फ्रेंडली बनें

जीवनोपयोगी आवश्यकताओं की पूर्ति में आज मनुष्य ऐसा फँसा है कि प्रकृति से दूर-दूर होता जा रहा है। लेकिन आज वसुंधरा दिन के अवसर पर यह मौका मिला है कि हम कुछ देर रुककर हमारी प्रकृति का विचार करें। इस वसुंधरा का विचार करें, जिससे हमारा जीवन संचालित है। ‘इको

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पारिवारिक रिश्तों को मिले नया आयाम – स्वस्थ परिवार का यही है राज़

अधिकतर लोगों की यही आशा होती है कि ‘मेरा परिवार खुशहाल, हँसता-खेलता रहे। मेरी खुशियों में मेरा परिवार शरीक हो ही लेकिन जब मैं थका-हारा, दुःखी, परेशान होकर घर लौटूँ तब भी मुझे वहाँ वही प्यार, विश्वास और सबका साथ मिले। सबके होते हुए मुझे कभी भी अकेलापन महसूस न

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