मैं सही मार्ग पर हूँ या नहीं?

मैं परम सत्य की खोज में हूॅ। लेकिन, क्या इसके लिए सचमुच इतना प्रयास करना और ष्ारीर को इतना कश्ट देना जरूरी है? क्याऐसा कोई नहीं है, जो मेरे सारे सवालों के जवाब दे सके?दुनिया भर में जिन आध्यात्मिक तरीकों का प्रचार-प्रसार हो रहा है, उनमें कुछ न कुछ गड़बड़

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1 मई श्रम दिवस – कर्मबंधन से मुक्ति

श्रम दिवस हमारे किए गए कर्म के पहलुओं को रेखांकित करता है| कर्म के प्रकार से लेकर उसकी प्रकृति तक को अनेक ढंग से हमारे बीच पेश भी करता है| चाहे हम सीईओ हों या एक कारपेंटर, हम एक तरह से कर्म के किसी हिस्से को निभा रहे होते हैं|

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सुनहरी समझ

एक समय की बात है, जब एक इंसान अपनी आजीविका चलाने के लिए पत्थर तोड़ा करता था| वह गॉंव के सिवान में पहाड़ियों पर हर रोज़ जीतोड़ मेहनत करता था| एक दिन पत्थर तोड़ते वक्त उसके ज़हन में एक खयाल कौंधा| उसने सोचा कि मैं दिनभर पत्थर तोड़ने के लिए

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विचारशून्य होने का सबसे आसान तरीका

कई लोग सोचते हैं कि शून्य में जाना कठिन है| यहॉं हम आपको एक ऐसी ध्यान पद्धति से रू-ब-रू कराने जा रहे हैं, जिससे कि आप विचारशून्य स्थिति से वाकिफ हो सकें| ‘विचार क्रमांक ध्यान’ इस ध्यान के ज़रिए आप शून्य में जा सकते हैं| हो सकता है कि यह

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आखिर जरूरत ही क्या है अध्यात्म की… (पट्टी खोलें आंखों की, सामने ही है प्रकाश)

खोजी: अध्यात्म की परिभाषा क्या है और जीवन में इसकी कितनी ज़रूरत है? सरश्री: अध्यात्म का अर्थ है खुद को जानना और अपने सच्चे स्वभाव की, सच्ची प्रकृति की पहचान करना| कई इंसान सोचते हैं कि अध्यात्म की इस हद तक तो कोई ज़रूरत ही नहीं है| आइए, इसे एक

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१४ ​​फरवरी – संत वैलेंटाइन डे असल में क्यों मनाया जाता है?

संत वैलेंटाइन रोमन काल में एक चर्च में पादरी थे| रोम के राजा ने घोषणा की कि शादीशुदा सिपाही राज्य के लिए किसी काम के नहीं हैं, अगर वे शादी कर लेते हैं तो उनका मन भटकता है और इसीलिए वह उन लोगों को सिपाहियों के रूप में बढ़ावा दे

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2015 नए साल का सरश्री द्वारा संदेश : सही सवाल की शक्ति

‘सवाल’ आध्यात्मिक उन्नति के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें हमें आत्मसाक्षात्कार तक पहुँचाने की ताकत होती है। कुछ सवाल इंसान में बचपन से ही मौजूद होते हैं। इंसान कई सदियों से ये सवाल पूछता आया है जैसे मैं कौन हूँ? मैं पृथ्वी पर क्यों हूँ? इत्यादि। ये सवाल आपके

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१ अप्रैल – आध्यात्मिक बीज डालने का दिन

दुनियाभर में १ अप्रेल को मूर्ख दिवस के रूप में मनाया जाता है| इस दिन लोग एक-दूसरे के साथ मसखरी करते हैं और उस मजाक से उत्पन्न हुई स्थितियों पर हँसते हैं| पर तब क्या होगा, जब वह मजाक आपके साथ किया जा रहा हो? अध्यात्म की दृष्टि से देखें

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लक्ष्य प्राप्ति में सदा आपके साथ आपका सबल चरित्र

हम सब पृथ्वी पर अपने-अपने विशेष उद्देश्य लेकर आये हैं| कुदरत हमें अपना लक्ष्य पाने के लिए सदा मार्गदर्शन दे रही है| यदि हमारा चरित्र बलवान होगा तो हम बिना विचलित हुए कुदरत के बताये रास्ते पर सीधे चल पायेंगे वरना हम हर छोटी घटना में लालच, सुस्ती और अज्ञान

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