Description
सवालों की रोशनी में स्वयं को जानने की यात्रा
संत सुकरात के पास जीवन के हर सवाल का तैयार जवाब नहीं था। उनके पास उससे भी अधिक शक्तिशाली चीज़ थी- सही सवाल पूछने की कला। वे ऐसे सवाल पूछते थे, जो हमारी धारणाओं को चुनौती देते, सोच की परतें खोलते और हमें अपने भीतर झाँकने के लिए प्रेरित करते।
क्या आपने कभी खुद से पूछा है-
1. मैं जो मानता हूँ, क्या वह सचमुच मेरी अपनी सोच है?
2. क्या मैं सत्य खोज रहा हूँ या केवल अपने विचार को सही साबित करना चाहता हूँ?
3. मेरी धारणाएँ मेरे फैसलों और रिश्तों को कितना प्रभावित करती हैं?
4. क्या मैं दूसरों को समझने से पहले स्वयं को समझता हूँ?
5. अगर मैं अपनी ही सोच पर सवाल उठाऊँ तो अपने बारे में क्या नया जान सकता हूँ?
यह पुस्तक आपको केवल संत सुकरात के दर्शन के बारे में पढ़ने का अवसर नहीं देती बल्कि उनके सवालों के माध्यम से अपनी सोच, विश्वासों, फैसलों और जीवन को नए नज़रिए से देखने का अवसर देती है।
अगर आप जीवन में केवल जवाब नहीं, समझ चाहते हैं; जानकारी नहीं, जागरूकता चाहते हैं; और अपने ही विचारों को एक नए आईने में देखना चाहते हैं तो यह पुस्तक आपको उन सवालों से मिलाएगी, जिन्हें शायद आपने कभी पूछा ही नहीं। क्योंकि कई बार जीवन बदलनेवाला उत्तर बाहर नहीं मिलता, वह एक सही सवाल बनकर हमारे भीतर जन्म लेता है।





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