Description
मैं जी किस लिए रहा हूँ- स्वयं से मुलाकात
क्या आपने कभी अपने अंदर उठते हुए सवालों को सच में सुना है? वे सवाल नहीं, जो दुनिया आपसे पूछती है बल्कि वे सवाल जो आपका अंतरमन फुसफुसाकर पूछता है-
1. मैं ऐसा क्यों महसूस करता हूँ- जो अच्छा नहीं लग रहा?
2. मेरे निर्णयों को सच में कौन चला रहा है- मैं या मेरी आदतें?
3. क्या मैं वह जीवन जी रहा हूँ, जिसे मेरा दिल चुनता है या जिसे समाज ने तय किया है?’
हम सब जीवन जीते हैं पर बहुत कम लोग अपने भीतर उतरकर जीते हैं। हम भागते हैं, कमाते हैं, निभाते हैं पर रुककर खुद से पूछना भूल जाते हैं कि ‘मैं असल में हूँ कौन?’ और मैं जी किस लिए रहा हूँ?
यह पुस्तक एक दर्पण है, जो आपके भीतर सोए हुए हिस्सों को जगाती है। हर पन्ना आपको रोकता है, हर सवाल आलसी मन को हिलाता है और हर उत्तर आपको आपसे मिलवाता है।
यह पुस्तक आपको केवल सोचने भर के लिए प्रेरित नहीं करती बल्कि समझने की यात्रा पर ले जाती है। जहाँ शब्द नहीं अनुभव बोलते हैं, तर्क नहीं, आत्मबोध जगता है, आप दूसरों को नहीं, खुद को पढ़ना शुरू करते हैं।
यह पुस्तक नहीं, एक निष्पक्ष संवाद है- आप और आपके मन के बीच।
तो आज रुकिए, एक साँस लीजिए, भीतर झाँकिए- अपने और पुस्तक के अंदर क्योंकि सच्ची यात्रा बाहर नहीं, अंदर है।









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