
आत्मनिर्भर नारी
ईश्वर ने जब संसार की रचना की तब उसने रचनात्मकता के शिखर पर नर और नारी की रचना की। नर व नारी यानी शिव और शक्ति, जिससे संसार पूर्ण होता है। स्त्री व पुरुष दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं, एक-दूसरे के बिना वे आधे-अधूरे हैं। ईश्वर ने पुरुष को सशक्त