
आज्ञा और एकाग्रता का दूसरा नाम संत एकनाथ
गुरु आज्ञा ने ऐसा पीछा किया कि रोज़मर्रा की बातों से ज्ञान मिलने लगा, शब्द के आगे ज्ञान दौड़ने लगा और जो कुछ भी मन में आया, वह सब ग्रंथार्थ होने लगा। ‘एकनाथी भागवत’ की रचना करते समय संत एकनाथ महाराज द्वारा कहे गए ये शब्द उनकी गुरु के प्रति