Description
मूड डायरेक्टिंग (एम.डी.) सिद्धांत
क्या आपका मन परिस्थितियों के अनुसार बार-बार उलझ जाता है?
क्या एक छोटी सी बात आपके पूरे दिन को प्रभावित कर देती है?
यह पुस्तक मूड को दबाने की बात नहीं करती।
यह उजागर करती है कि मूड बनता कैसे है और बिगड़ता क्यों है।
यह बताती है कि मूड कोई अचानक होनेवाली चीज़ नहीं बल्कि यह आपकी सोच, आदतों और जागरूकता से जुड़ा हुआ अनुभव है।
जब आप मूड से लड़ना छोड़कर, उसे देखना व समझना (मूड डायरेक्टिंग एम.डी. सिद्धांत) सीखते हैं तो उसे संभालना अपने-आप आसान हो जाता है।
यह किताब सरल उदाहरणों, व्यावहारिक दृष्टिकोण और “नीरज- एम.डी. की” रोचक कहानी के साथ, दिखाती है कि कैसे बिना दबाव और बनावट के आप अपने मूड को बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं। क्योंकि जीवन तब हल्का होता है जब मूड नहीं, समझ मार्गदर्शन करती है।
यह पुस्तक मूड बदलने की नहीं, खुद को समझने की प्रक्रिया है।









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