Description
दिल से पुकारो, ईश्वर सुनते हैं
कुछ कहानियाँ समय के साथ पुरानी नहीं होतीं बल्कि हर पीढ़ी को नई रोशनी देती हैं। ऐसी ही एक अगर कहानी है- बाल भक्त ध्रुव की।
ध्रुव, एक छोटा-सा बालक था लेकिन उसका हृदय विश्वास और भक्ति से ओत-प्रोत था।
जब जीवन ने उसे ठुकराया, जब अपने भी दूर हो गए तब उसने रोना नहीं चुना, चुनी भक्ति।
ध्रुव ने ईश्वर को पुकारा- न शोर से, न शब्दों से बल्कि सच्चे मन और निश्चल श्रद्धा से और भगवान ने भी उसका भाव समझा। उसके धैर्य, साहस, भक्ति के आगे स्वयं प्रकट हुए और उसे स्थिरता का प्रतीक बना दिया- ध्रुव तारा The north star.
ध्रुव की कहानी हमें सिखाती है-
– दुःख से भागो मत, उसे अपनी शक्ति बनाओ।
– छोटे प्रयास भी बड़े बन सकते हैं, अगर मन सच्चा हो।
– शांत रहो, विश्वास रखो, परिस्थितियाँ बदल जाएँगी।
– जब कोई तुम्हें न समझे तब ईश्वर को समझाओ, वे ज़रूर सुनेंगे।
बालक ध्रुव ने ये साबित किया कि सच्ची भक्ति उम्र नहीं देखती और ईश्वर का मार्ग किसी के लिए बंद नहीं होता।
आज भी ध्रुव की कहानी हर बच्चे से कहती है, ‘अगर मैं कर सकता हूँ तो तुम क्यों नहीं?’
आओ, इस प्रेरणादायक यात्रा से हम भी सीखें भक्ति, विश्वास और संकल्प से ज़िंदगी को कैसे प्रकाशमय और सार्थक बनाया जा सकता है।









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